प्रकृति की अनुपम भेंट किशमिश | किशमिश के चमत्कारी गुण | Nature’s unique gift raisins | miraculous properties of raisins

किशमिश प्रकृति द्वारा प्रस्तुत अनेक गुणकारी चीजों में से एक है जिसे द्राक्ष या दाख भी कहते है किशमिश का आकार छोटा और दाख का आकार बड़ा होता है |
बड़े आकार का अंगूर सूखने के बाद मुनक्का या दाख बन जाता है | किशमिश एक बहुत उपयोगी चीज है आइये जानते है इसके गुण और उपयोग |

प्रकृति की अनुपम भेंट किशमिश | किशमिश के चमत्कारी गुण |
किशमिश ( raisins )

जो मनुष्य कब्ज का रोगी नहीं है वो आजकल भाग्यशाली माना जाता है | वह अच्छी दिनचर्या का पालन करने वाला है वरना 100 में से 85 % आदमी कब्ज रोग से पीड़ित है | मनुष्य को स्वस्थ रहने के लिए केवल 2 चीजों का पालन कर लेना चाहिए | पहला एक तो दिमाग साफ़ रहे और शोक चिंता व् तनाव से मुक्त रहे और दूसरा पेट साफ़ रहे यानि कब्ज बिलकुल भी नहीं हो | यदि आप भी स्वस्थ रहना और कब्ज से छुटकारा पाना चाहते है तो आज से ही किशमिश का उपयोग करे | किशमिश raisins के उपयोग के बारे में हमारे डॉ. साहब है जिनका नाम सोहन लाल जी जिन्होंने भी किशमिश के उपयोग के बारे में बताया है हम भी आपको उनके ही द्वारा बत्ताए गए कुछ उपयोग शेयर कर रहे है |

किसमिश के उपयोग व् रोगो में उपयोगी

किशमिश का उपयोग कई रोगो को दूर करने में किया जा सकता है जिन रोगियों को बवासीर , पित्त – प्रकोप , जलन ,उलटी, रक्त विकार ,कमजोरी ,दुबलापन ,वजन न बढ़ना, त्वचा का रुखा पन , आँखों का धुंधला पन आदि रोग हो उन्हें किशमिश का सेवन करना चाहिए | इसका उपयोग सर्दी खांसी जुकाम में भी उपयोगी है | इसके सेवन से चुस्ती फुर्ती और ताजगी बनी रहती है | महर्षि वाग्भट ने इसे ” फलोत्तम – रसाला ” कहा है | और इसका आसव और शरबत भी बनाया जा सकता है |

आयुर्वेदिक मत

आयुर्वेदिक शास्त्रों के अनुसार द्राक्ष दस्तावर शीतल नेत्रों को हितकारी, पुष्टिकारी, भरी ,पाक और रास में मधुर, स्वर को उत्तम करने वाला, कसैला ,मल और मूत्र को निकलने वाला ,कोठे में वायु बढ़ाने वाला ,वीर्य वर्धक, कफ पुस्टि और रूचि को उत्पन्न करने वाला है |यह प्यास ,ज्वर, श्वास ,कास ,वात वात ,रक्त ,कमला, पेशाब की रुकावट ,रक्तपित्त ,मोह ,जलन, शोष और मदात्य नामक व्याधियों को नष्ट करता है |

चमत्कारी किशमिश के गुण

दाख परमात्मा का दिया हुआ विटामिनो से भरपूर टॉनिक है वैज्ञानिको ने बताया है की द्राक्ष विटामिन ए बी सी और लौह कैल्शियम पौटेशियम सेलुलोज शर्करा तथा कार्बनिक एसिड प्रचुर मात्रा में पाया जाता है | पौश्टिकता की दृस्टि से द्राक्ष अन्य मेवा से भी बढ़कर शरीर को पुस्टि सुरक्षा चुस्ती और फुर्ती बल देने वाला टॉनिक है |

यह आहार भी है और औषधि भी है

यूनानी हाकीम भी इसे कफ को पतला करने वाला, मासिक धर्म को नियमित करने वाला ,लकवा, गठिया ,सिरदर्द और पित्त प्रकोप को शांत करने वाला बताते है | आयुर्वेद के बड़े- बड़े ऋषि मुनि बड़े – बड़े वैज्ञानिक और ज्ञानी थे उन्होंने भी द्राक्ष के कई उपयोग आयुर्वेद में बताये है और वे इसे अल्पाहार में शामिल करते थे | स्वाथ्य की रक्षा और शरीर की पुस्टि के लिए द्राक्ष का सेवन कर लाभ उठाना चाहिए |

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